13. चलता-कुँवरी(अनूदित कहानी) ✍ मूल (असमीया): लक्ष्मीनाथ बेजबरुवा; अनुवाद: बिभावना डेका

एक राजा की दो रानियाँ थीं । वे दोनों गर्भवती हुईं । एक दिन दोनों रानियों की  संतानें हुईं । बड़ी रानी ने एक लड़के और छोटी रानी ने एक चलता  को जन्म दिया । छोटी रानी को बड़ा दुख हुआ कि एक चलता को जन्म दिया है और उसने उस चलते को पिछवाड़े में फेंक दिया । पर देखा गया कि रानी के काम करते या सोते समय वह चलता हमेशा लुड़कती हुई उनके पास आ जाती है । रानी के फेंक देने पर भी वह चलता फिर उन्हीं के पास लुड़ककर आ जाती । एक दिन सुनसान दोपहर को वह चलता घूमती हुई पनघट पहुँचकर वहीं थोड़ा रुक जाती है । उसी समय एक राजकुमार भी उसी पनघट की सुनसान जगह पर मछली फँसाने के लिए बंसी बिछा रहा था। राजकुमार ने देखा कि उस चलते से एक सुंदर लड़की बाहर निकली । उसने नदी में नहाकर सुंदरता से चारों ओर चमकाया और बालों को धूप में सुखाया । फिर वह चलते के अंदर घुस गयी और लुड़ककर माँ के घर वापस आयी। राजकुमार उस लड़की की सुंदरता से मोहित होकर पनघट में ही बंसी छोड़कर घर को लौट आया और रूठकर कोप भवन में घुसा रहा।

                                                               

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