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6. डॉ. लता अग्रवाल की कविताएँ
लौट आओ पापा जानती हूँ वक्त की फितरत नहीं लौटना न ही गया वक्त कभी लौटकर आता है दोबारा । न लौटकर आया है कभी…
7. घास : सात कविताएँ(कविता) ✍ राकेश रोहित
1 बहुत नमी के बाद हो जाती है बारिश बहुत प्रतीक्षा के बाद खिल जाते हैं फूल बहुत बुलाने पर भी जब नहीं आती है…
8. भीखमंगा(कविता) ✍ धृति बरा
वह तुम्हारी तरह संतुष्टि के लिए नहीं तड़पता, वह तो तीन वक्त की रोटी के लिए तड़पता है । संतुष्टि मिले न मिले, बस किसी…
9. आओ पानी बचाओ(कविता) ✍ डी॰ आर॰ समर्पिता, डी॰ आर॰ समादृता
तुम्हारे बिन पानी याद आती है नानी सूख जाएगा जगत सारा अगर छोड़ दिया तुमने साथ हमारा। पानी तुम हमारी माता हो सारे…
10. रे बड़े भाई(अनूदित कहानी) ✍अनुवादक: पूजा बरुवा
दो-एक पुराने किस्म की घोड़ा-गाड़ी, दो-एक नई-पुरानी मोटर गाड़ी, दो-चार श्रांत भारवाही कुली इन सबके अनिश्चित समन्वय में रेल स्टेशन के पास स्थित गुवाहाटी-शिलांग मोटर…
11. मिचिङ समाज का परम्परागत बिहु उत्सव(अनूदित आलेख) ✍अनुवादक : संजीव मंडल
मूल (असमीया) : पल्लवी आरंधरा असम विभिन्न जातियों-जनजातियों की मिलनभूमि है। विभिन्न जाति-जनजातियों की बहुरंगी सांस्कृतिक विरासत से भरपूर असम के जनमानस के लिए बिहु…
12. नवीन सूरज (अनूदित कविता) ✍ बर्णाली मोदक
पूछा था प्रश्न पहले दिवस के सूरज ने नए सत्ता के उद्गम में तुम कौन? उत्तर रहित। बीत गया सालों-साल अंतिम सूरज दिवस का उच्चारित…
13. असम के विशिष्ट हिन्दी सेवी गोलोक चन्द्र वैश्य का साक्षात्कार ✍ साक्षात ग्रहण: डॉ. मालविका शर्मा
1. डॉ॰ मालविका शर्मा- नमस्कार सर। आज आपसे आपके जीवन और कर्म के बारे में कुछ बातें करने आयी हूँ। गोलोक चन्द्र वैश्य- नमस्कार।आपका…
14. চাৰ্বাক দৰ্শন আৰু নৱকান্ত বৰুৱাৰ কবিতা ‘চাৰ্বাক’(প্ৰবন্ধ) ✍ ড০ শিপ্ৰা পাইক
প্ৰত্যেক মানুহৰেই নিজাববীয়াকৈ এটা জীৱন দৰ্শন থাকে যাক মূল কৰি তেখেতে নিজ লক্ষ্যত উপনীত হোৱাৰ চেষ্টা কৰে। নাস্তিকতাবাদৰ অন্যতম দৰ্শন হ’ল চাৰ্বাক দৰ্শন। অৰ্থাৎ Eat…
15. অসমীয়া থলুৱা খাদ্যৰ বিপণন : সাম্প্ৰতিক পক অৱস্থা আৰু সম্ভাৱনীয়তা(প্ৰবন্ধ) ✍ সাক্ষী প্ৰিয়ম্বদা
“The soul of India lives in its villages” ‘অৰ্থাৎ ভাৰতবৰ্ষৰ আত্মা প্ৰতিখন গাঁওৰ মাজতেই বিলীন হৈ আছে।’ – মহাত্মা গান্ধীজাতিৰ পিতা মহাত্মা গান্ধীয়ে কৈছিল যে…
Dr. Rita Moni Baishya




